गुरुवार, 17 फ़रवरी 2011

माशअल्ला मिशेल

 
ओबामा तीन दिन भारत में रहे और छाये रहे। अखबारों-चैनलों में ओबामा ही ओबामा थे। क्या कहेंगे! यह कहेंगे कि नहीं! यह तो कहना ही चाहिए! यह क्यों कहा! क्या देंगे! क्या ले जाएंगे! आदि-इत्यादि कयास और खबरें! पर इस कूटनीतिक कसरत-कवायद के बीच मिशेल ओबामा की उपस्थिति भी बेहद खबर-दार रही। यह उपस्थिति अत्यंत सहज, स्फूर्तिदायक और भरोसेमंद सी थी। उन्होंने बच्चों से लेकर बड़ों तक सबको अपना दिलदादा बनाया। बोलना भी उनका सीधा-स्पष्ट और आत्मीय था। वे खूब नाचीं, खूब घूमीं और खूब चर्चा में रहीं। स्वागत आदि कार्यक्रमों में जहां साथ में बराक भी थे, वहां मिशेला ओबामा हावी दिखीं। उनकी भाव-भंगिमाओं से लेकर उनके परिधानों पर भी टीवी पर रस ले-लेकर चर्चाएं होती रहीं।

मिशेल ओबामा को दुनिया अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की पत्नी के नाते प्रथम अमेरिकी महिला के रूप में जानती है। लेकिन वे इससे कहीं अधिक हैं। बहुत से लोगों के लिए वे उम्मीद की एक किरण हैं और आगे बढ़ने की प्रेरणा भी, महिलाओं के लिए खासतौर पर। दुनिया के उन तमाम लोगों के लिए वे प्रेरणास्रोत हैं, जो सामाजिक लड़ाई में कहीं पीछे छूट गए, लेकिन अपना हक पाने के लिए जो आज भी शांतिपूर्ण लड़ाई लड़ रहे हैं। वे महिलाओं को अपनी स्थिति मजबूत करने की प्रेरणा भी देती हैं। यहां तक कि अपने पति बराक ओबामा के लिए भी वे किसी प्रेरणा से कम नहीं हैं। वे हर तरह से उनकी आत्मनिर्भरता की समर्थक हैं, लेकिन परिवार को भूलने के लिए कभी नहीं कहतीं। कॅरियर और परिवार के बीच बेहतर सामंजस्य को ही वे आदर्श मानती हैं और ऐसा करने में महिलाओं की मदद भी करती हैं।
प्रथम अमेरिकी महिला के रूप में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है और दुनिया उन्हें इसी रूप में जानती है। लेकिन बकौल मिशेल, वे पहले दो प्यारी बच्चियों की मां हैं। पर इससे भी पहले वे पिता फ्रेजर और मां मारियन रॉबिन्सन की बेटी हैं। इसके बाद ही पत्नी, वकील या कुछ और। बेहिचक-बेझिझक अपने माता-पिता को कर्मचारी वर्ग का बताते हुए वे उन्हें अपना आदर्श बताती हैं। उन्हें लोगों को यह बताने में भी गुरेज नहीं है कि उनका बचपन बड़े अभाव में बीता। दक्षिणी शिकागो के एक छोटे से मकान में उनका और भाई बचपन बीता। पिता शिकागो के जल विभाग में पंप ऑपरेटर थे। युवावस्था से ही वे मल्टिपल स्क्लेरोसिस नामक बीमारी से पीड़ित थे, लेकिन इतने पैसे नहीं थे कि उसका इलाज करवा सकें। पर इस अवस्था में भी उन्होंने काम नहीं छोड़ा, क्योंकि परिवार की मौलिक जरूरतें पूरी करने के लिए भी पैसे की जरूरत थी। मां मारियन घर में ही रुकती थीं, ताकि मिशेल और उनके बड़े भाई क्रेग की देखभाल कर सकें। रॉबिन्सन दंपति भले अपने बच्चों की बहुत सारी जरूरतें पूरी नहीं कर सके, लेकिन घर में उन्हें भरपूर प्यार दिया। जीवन से जुड़े कई अहम नैतिक मूल्य भी उन्हें माता-पिता से मिले, जिनका जिक्र आज भी मिशेल करती हैं। इन्हें आत्मसात करके ही मिशेल और क्रेग जिंदगी में आगे बढ़ते गए और आज सारी दुनिया उनका लोहा मानती है।
मिशेल को स्पष्टवादी और दृढ़ निश्चयी महिला के रूप में जाना जाता है। उन्होंने हमेशा वही काम किया, जिसकी अनुमति उनके दिल ने दी। वे हमेशा से सैनिक परिवारों के समर्थन में रही हैं। कामकाजी महिलाओं को उन्होंने परिवार और कॅरियर के बीच संतुलन स्थापित करने में मदद दी। पूरे देश में उन्होंने राष्ट्रीय सेवाओं, कला और स्वास्थ्यप्रद भोजन को तरजीह दी। वे बेहद सहज एवं स्वाभाविक महिला हैं। भारत दौरे के दौरान मुंबई हो या दिल्ली हर जगह उनकी सहजता दिखी, जो आमतौर पर राजनीतिक व कूटनीतिक महिलाओं में देखने को नहीं मिलता। मुंबई में वे बॉलीवुड की फिल्मी धुन पर जमकर थिरकीं, तो मराठी संस्कृति को दर्शाते लोकनृत्य में भी उन्होंने ताल से ताल मिलाया। बच्चों के प्रदर्शन से आह्लादित मिशेल ने उन्हें गले लगाया तो बच्चे भी बेहद सहजता से उनसे मिले। लेकिन जब यही मिशेल मुंबई के सेंट जेवियर में युवा छात्रों से मिलती हैं तो बेहद गंभीरता से उन्हें अभाव में बीते अपने बचपन के बारे में बताती हैं। लेकिन तमाम मुश्किलों के बावजूद छात्रों को सपने देखने के लिए भी प्रोत्साहित करती हैं, ताकि उन्हें पूरा कर जीवन में आगे बढ़ा जा सके। छात्रों को यह कहकर वे ओबामा पर चुटकी लेने से भी नहीं चूकतीं कि उनसे छात्र कड़े सवाल पूछें। ओबामा जो पहले से ही मिशेल की प्रतिभा के कायल हैं, छात्रों को बताते हैं कि वे उनसे बेहतर वक्ता हैं।
वहीं, दिल्ली में उन्होंने जमकर खरीदारी की तो अपने परिधानों के लिए भी वाहवाही पाई। मीडिया मिशेल की हर अदा पर मानो फिदा हो। मिशेल ने अपनी वक्तृत्व क्षमता का लोहा अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के दौरान ही मनवा लिया था, जब राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में ओबामा के पक्ष में उन्होंने जगह-जगह प्रचार अभियान चलाया। लेकिन इस क्रम में वे अपने परिवार को नहीं भूलीं। उन्हें बेहतर पता था कि बच्चियों को भी उनकी जरूरत है। उन्हें अपनी प्राथमिकताएं मालूम हैं और यह सब शायद उन्होंने अपने अभिभावकों से सीखा। मिशेल दुनिया की उन लाखों-करोड़ों कामकाजी महिलाओं के लिए आदर्श हैं, जो परिवार और कॅरियर के बीच सामंजस्य बिठाकर चलने में यकीन करती हैं।
मिशेल का जन्म सत्रह जनवरी, 1964 को रॉबिन्सन दंपति की दूसरी संतान के रूप में हुआ। रॉबिन्सन दंपति, जिनकी आय सीमित थी, कभी स्कूल नहीं गए। लेकिन कम आमदनी में भी उन्होंने अपने बच्चों की पढ़ाई से समझौता नहीं किया। जीवन में आगे बढ़ने के लिए शिक्षा की अहमियत को समझते हुए उन्होंने बच्चों की पढ़ाई को तरजीह दी। शिकागो पब्लिक स्कूल से शुरुआती शिक्षा ग्रहण करने के बाद मिशेल ने प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से सोशियोलॉजी एंड अफ्रीकन-अमेरिकन स्टडीज में आगे की पढ़ाई की। फिर हावर्ड लॉ स्कूल से उन्होंने कानून में स्नातक किया और इसके बाद 1988 में शिकागो में ही सिडल एंड ऑस्टिन लॉ फर्म से जुड़ गईं। यहीं उनकी मुलाकात बराक ओबामा से हुई। कंपनी ने उन्हें ओबामा के सलाहकार की जिम्मेदारी सौंपी, जिसे उन्होंने बखूबी निभाया। दोनों बीच का यह व्यवसायिक संबंध कब व्यक्तिगत प्रेम संबंध के रूप में बदल गया, उन्हें जानकारी भी नहीं हुई। जब आपसी संबंधों का एहसास हुआ तो दोनों ने शादी का फैसला लिया और 1992 में एक-दूसरे से विवाह बंधन में बंध गए।
इससे सालभर पहले मल्टिपल स्क्लेरोसिस बीमारी से मिशेल के पिता के पिता का निधन हो चुका था। पिता के निधन के बाद मिशेल ने अपनी जिंदगी का पुनर्मूल्यांकन किया। उन्होंने कॉरपोरेट लॉ फर्म छोड़ने और सार्वजनिक क्षेत्र से जुड़ने का फैसला किया। उन्होंने सबसे पहले शिकागो मेयर के साथ सहायक के रूप में जुड़ी। फिर प्लानिंग एंड डेवेलपमेंट डिपार्टमेंट की कमिश्नर भी बनीं। 1993 में उन्होंने पब्लिक एलायज शिकागो की स्थापना की, जो युवाओं को सार्वजनिक क्षेत्र की सेवाओं के लिए प्रशिक्षण देता था। 1996 में उन्होंने शिकागो विश्वविद्यालय में डीन ऑफ स्टूडेंट सर्विसेज के रूप में अपनी सेवा दी। यहां उन्होंने कम्युनिटी सर्विस कार्यक्रम भी शुरू किया। मई, 2005 में उन्हें शिकागो विश्वविद्यालय के कम्युनिटी एंड एक्सटर्नल अफेयर का उपाध्यक्ष बनाया गया। इससे पहले नवंबर, 2004 में ओबामा सीनेट के लिए चुने जा चुके थे। उनका अधिकतर कामकाज वाशिंगटन में होता था। इसलिए ओबामा कभी शिकागो तो कभी वाशिंगटन में होते थे। लेकिन मिशेल ने तब भी शिकागो में रहना ही तय किया था। यह कॅरियर के प्रति उनके समर्पण को दर्शाता है। राष्ट्रपति चुनाव के लिए ओबामा की उम्मीदवारी की घोषणा के बाद उन्होंने एकबार फिर अपने समय का मूल्यांकन किया और परिवार की जरूरतों को देखते हुए कामकाज व परिवार के बीच बेहतर सामंजस्य बिठाया। चुनाव अभियान के दौरान उन्होंने ओबामा के लिए खूब प्रचार किया, वह भी प्रभावशाली ढंग से। आज ओबामा अमेरिका के राष्ट्रपति हैं तो निश्चित रूप से इसमें मिशेल की अहम भूमिका है, जिसे ओबामा भी स्वीकार करते हैं।

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